पत्रकारों, शिक्षाविदों और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा मुक्त भाषण और शक्ति के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की थी. यह अभिव्यक्ति (अपने विचार दूसरों के साथ बाँटना) की आज़ादी पर शिकंजा कसने हेतु भी इस्तेमाल किया जा सकता है
• इस विधेयक में अधिकारियों को यह अधिकार होगा कि वे 'फेक न्यूज़' हटाने का आदेश दे सकते हैं और भारी जुर्माना लगा सकते हैं.
• इस विधेयक में मंत्रियों को यह हक़ होगा कि वह फेसबुक जैसी सोशल मीडिया वेबसाइटों को उन पोस्ट पर 'चेतावनी' लगाने का आदेश दे सकते हैं जिन्हें अधिकारी फेक मानते हैं आलोचकों का कहना है कि कानून सरकारी अधिकारियों को अपने तरीके से मनचाहा शक्तियां प्रदान करता है. उनका कहना है कि निजी क्षेत्र को फेक और बिना उत्तरदायित्व के बयानों का अंतिम मध्यस्थ होना चाहिए.
• यह विधेयक 72 सांसदों की सहमति, 09 सांसदों की असहमति से पारित हुआ. खुद को तीन नामांकित सांसदों ने इससे दूर रखा. प्रशासन के मुताबिक, यह विधेयक किसी की विचार, आलोचना, किसी को चिढ़ाने या दुखी करने पर लागू नहीं होता है.
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