अमित शाह ने लोकसभा में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन 6 महीने बढ़ाने का प्रस्ताव दिया


गृह मंत्री अमित शाह ने 28 जून 2019 को लोकसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर में इस साल के अंत तक चुनाव होंगे. लोकसभा में अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन 6 महीने बढ़ाने का प्रस्ताव दिया. उन्होंने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में अभी विधानसभा अस्तित्व में नहीं है, इसलिए चुनाव होने तक वहां राष्ट्रपति शासन को बढ़ाया जाए.

अमित शाह ने दूसरा प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर में आरक्षण प्रश्ताव में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया. जिसके अंतर्गत अब आरक्षण का लाभ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों को भी मिलेगा. पहले केवल नियंत्रण रेखा के नजदीक रहने वाले लोग इसका फायदा उठाते थे.

गृह मंत्री शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हो सकी है. हालांकि राज्यपाल शासन और राष्ट्रपति शासन के दौरान कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी गयी है.

मुख्य बिंदु:
• गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004 का संशोधन करने वाला विधेयक पेश किया है.
• उन्होंने कहा कि घाटी में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए. अधिनियम में संशोधन करने से जम्मू एवं कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वालों को भी लाभ मिलेगा.
• उन्होंने कहा कि इससे जम्मू, कठुआ, सांबा के सीमावर्ती इलाकों में रहने वालों को लाभ मिलेगा.
• गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीर में 15 हजार बंकर बनाने का काम जारी है जिनमें से 4400 बंकर बन कर तैयार हो चुके हैं.
• अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में यह पहली बार नहीं है कि यहां राज्यपाल या राष्ट्रपति शासन लगाया जाए. कई बार ऐसी स्थिति बनी है कि कानून में संशोधन किया गया.

अमित शाह गृह मंत्री बनने के बाद से ही जम्मू कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने पर खास नजर बनी हुई है. उन्होंने हाल ही में दो दिवसीय दौरे पर भी घाटी में आतंकवाद को रोकने के लिए उठाए जा रहे सेना और पुलिस के कदमों की समीक्षा की थी.
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