गजराज ने प्रतीकात्मक रूप से मंदिर के दक्षिणी प्रवेश द्वार को धक्का देकर खोला, जो उत्सव के शुभारंभ का संकेत था. यह उत्सव लगातार 36 घंटे तक मनाया जाता है.
त्रिशूर पूरम दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण उत्सव है जिसे केरल में आयोजित किया जाता है. इस उत्सव में स्थानीय ही नहीं बल्कि सैंकड़ों पर्यटक भी शामिल होते हैं.
इस उत्सव में 30 हाथियों को पूरी साज-सज्जा के साथ शामिल किया जाता है. इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ इलान्जिथारा मेलम नामक लाइव परफॉरमेंस भी आयोजित की जाती हैं.
इस दौरान लगभग 250 कलाकार भाग लेते हैं.
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